| Format | Paperback |
|---|---|
| ISBN | 9789362055767 |
| Color Type | Black & White |
| No. of Pages | 91 |
| Dimensions | 139.7 X 215.9 |
| Publication date | 02-01-2024 |
| Publisher | SANAGE PUBLISHING HOUSE LLP |
| Language | Hindi |
Usne Kaha Tha Aur Anya Kahaniyaan (Hindi)
(0)
By (author)
Charndradhar Sharma Guleri
चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' का जन्म 7 जुलाई, 1883 को पुरानी बस्ती, जयपुर में हुआ था। उनके पुरखे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में 'गुलेर' गाँव के निवासी थे। लिहाजा कवियों, लेखकों
Read more...
चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' का जन्म 7 जुलाई, 1883 को पुरानी बस्ती, जयपुर में हुआ था। उनके पुरखे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में 'गुलेर' गाँव के निवासी थे। लिहाजा कवियों, लेखकों द्वारा जोड़े जाने वाले तख़ल्लुस (उपनाम) की जगह उन्होंने 'गुलेर' को ही 'गुलेरी' कर लिया। पिता ‘पंडित शिवराम शास्त्री जी’ को महाराजा द्वारा राजसी सम्मान प्राप्त हुआ था, सो परिवार जयपुर में बस गया। यहीं 'गुलेरी जी' का जन्म हुआ। उनकी माता ‘लक्ष्मी देवी’ थीं।
वेद, पुराण और संस्कृत का ज्ञान उन्हें घर से ही मिलना शुरू हो गया था। अत: 10 वर्ष की तरुण आयु में ही वह भाषण देने लगे थे। उन्होंने पाली, प्राकृत, ब्रज, अवधी, मराठी, गुजराती, राजस्थानी, पंजाबी, बाँग्ला, हिन्दी, अंग्रेजी, फ्रेंच और अपभ्रंश भाषा के साथ ही साथ कई विदेशी भाषाओं का भी ज्ञान अर्जित किया।
वे आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रकाश स्तंभ कहे जाते हैं। वहीं ‘द्विवेदी युग’ के महान साहित्यकार के रूप में उनकी पहचान है।
सुखमय जीवन, बुद्धू का काँटा और उसने कहा था, हिन्दी साहित्य जगत की अमर कृतियाँ हैं। उसने कहा था, तो गुलेरी जी का पर्याय ही बन चुकी है।
प्राचीन इतिहास और पुरातत्व उनका प्रिय विषय था। उनकी गहरी रुचि भाषा विज्ञान में थी। उनकी विद्वत्ता का ही प्रमाण और प्रभाव था कि 1904 से 1922 तक उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण संस्थानों में अध्यापन कार्य किया और इतिहास में 'दिवाकर' की उपाधि से सम्मानित हुए। पं. मदन मोहन मालवीय के आग्रह पर 11 फरवरी, 1922 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राच्य विभाग के प्राचार्य पद को सुशोभित किया।
गुलेरी जी की सृजनशीलता के चार मुख्य पड़ाव हैं — समालोचक; मर्यादा; प्रतिभा; और नागरी प्रचारिणी पत्रिका। इनके माध्यम से गुलेरी जी का रचनाकार व्यक्तित्व उभरकर सामने आया।
Customer Reviews
0
0 reviews









